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मंगलवार, 19 जुलाई 2016

मूसीबतों से भागो मत सामना करो

मूसीबतों से भागो मत सामना करो

     एक बार एक व्यक्ति काशी में रास्ते पर कहीं जा रहा था। वह जिस रास्ते से होकर गुज़र रहा था, उसके एक ओर तालाब और दूसरी ओर ऊँची दीवार थी। उस स्थान पर बहुत से बंदर रहते थे, जिन्होंने बहुत आतंक मचा रखा था। रास्ते से गुज़रते उस व्यक्ति को देख वे चिल्लाने लगे। बंदरों को इस प्रकार चिल्लाते देख वह व्यक्ति डरकर भागने लगा। उस व्यक्ति को भागते देख बंदरों की हिम्मत बढ़ गई और वे उसके नज़दीक आकर पैरों में काटने की कोशिश करने लगे।
     बंदरों के इस अचानक हमले से वह व्यक्ति एकदम घबरा गया। तथा बचने के लिए और तेज़ी से भागने लगा। लेकिन जितनी तेज़ी से वह भागता, उतनी ही तेज़ी से बंदर भी उसका पीछा करते। जब बंदरों से पीछा छुड़ाना उसे असंभव लगने लगा तो घबराहट में उसके दिल की धड़कने बढ़ने लगीं। वह हताशा में गिरता-पड़ता भाग रहा था कि उसके कानों में एक आवाज़ पड़ी-भागों मत, बंदरों का सामना करो। उस आवाज़ ने जैसे उस व्यक्ति के शरीर मे नई जान डाल दी और वह रुककर तुरंत पलटा। उसे पलटते देख बंदर अपनी जगह पर रुक गए। वह जैसे ही आगे बढ़ा, बंदर पीछे हटने लगे। इस बीच उसने रास्ते में पड़े पत्थरों  को उठाकर बंदरों की ओर फेंकना शुरु कर दिया। देखते ही देखते सारे बंदर भाग गए।
     इसके बाद उसकी दृष्टि उस व्यक्ति को तलाशने लगी, जिसने उसे इस विपत्ति का सामना करने का साहस दिया। उसने देखा कि थोड़ी ही दूर पर एक स्वामी जी खड़े हैं। उसने स्वामी जी के पास पहुँचकर उन्हें धन्यवाद दिया और बोला कि आज आपने मुझे इन बंदरों से बचा लिया। इस पर स्वामी जी बोले-मैने नहीं, तुम्हारे साहस ने तुम्हें बचाया है। जीवन में आने वाली किसी भी विपत्ति का सामना यदि इसी तरह साहस से करोगे तो वह इन बंदरों की तरह दूर भाग जाएंगी। दूसरी ओर विपत्ति से जितना भागोंगे, वह उतनी ही तेज़ी से पीछा कर बंदरों की तरह काटने की प्रयास करेंगी। विपत्तियों से डरकर भागने वाला कायर व्यक्ति उन पर कभी विजय नहीं पा सकता।
     भगवा वस्त्र, सिर पर पगड़ी, हाथों में बेंत और कंधों पर चादर डाले स्वामी जी एक बार अमेरिका के शिकागो शहर की सड़कों से गुज़र रहे थे। उनकी यह वेशभूषा अमेरिकियों के लिए नया अनुभव था। इस प्रकार विचित्र से वस्त्रों में बिना हैट लगाए व्यक्ति को देखकर उन्हें बड़ा आश्चर्य हुआ। कुछ लोग स्वामी जी का मज़ाक बनाते हुए उनके पीछे लग गए। उसमें एक महिला भी शामिल थी जो अधिक वाचाल थी और स्वामी जी के वस्त्रों को लेकर फब्तियां कस रही थी। कुछ दूर चलने के बाद स्वामी जी रूके और उस महिला को संबोधित करते हुए बोले-बहन, लगता है तुम्हारे देश में सज्जनता की पहचान कपड़ों से होती है। लेकिन मैं जिस देश से आया हूँ, वहाँ सज्जनता की पहचान व्यक्ति के कपड़ों से नहीं, उसके चरित्र से होती है। स्वामी जी की बात सुनकर उनका पीछा करते सभी लोग निरुत्तर हो गए और उन्हें अपने किए पर शरमिंदगी महसूस होने लगे।
     आप में से बहुत से लोग समझ गए होंगे कि इन प्रसंगों में जिन स्वामी जी का उल्लेख हुआ है, वे कौन हैं? ये प्रसंग हैं भारतवर्ष के महान संत स्वामी विवेकानंद जी , जिन्होने भारतीय धर्म-दर्शन को अंतरराष्ट्रीय  मंचों पर पहचान दिलाई। आज जब कि प्रतिस्पर्धा का दौर बढ़ रहा है, ऐसे में उनकी शिक्षाएँ अधिक प्रासंगिक हो गई हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए आज हमने स्वामी जी से जुड़े प्रसंगों का उल्लेख किया है। इन प्रसंगों में एक बात गौर करने लायक है कि स्वामी जी न सिर्फ दूसरों को रास्ता दिखाते थे, बल्कि स्वयं भी उन पर अमल करते थे। उन्होने पीछा करते बंदरों से डरकर भागते व्यक्ति को डटकर सामना करने की सलाह ही नहीं दी, बल्कि अपना पीछा करती विदेशी महिला को मुँहतोड़ जवाब भी दिया। यानी उन्होने स्वयं भी विषम स्थिति का डटकर मुकाबला किया। यही शिक्षा वे दूसरों को भी देते थे। कुल मिलाकर मंत्र यह है कि "मुसीबतों से भागो मत, उनका सामना करो।' फिर चाहे मुसीबत कैसी भी हो।

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