भवन निर्माण की कला में निपुण कारीगर की प्रसिद्धि सुनकर उसके नगर के राजकुमार ने उसे एक बेहद खूबसूरत महल निर्माण का कार्य सौंपा। वह पूरी लगन और मेहनत से महल के निर्माण में लग गया। जब निर्माण कार्य अंतिम स्थिति में था, तो राजकुमार महल देखने आया। उसकी खूबसूरती देखकर वह मंत्रमुग्ध हो गया। राजकुमार ने कारीगर की खूब प्रशंसा की। अंत में उसने उससे पूछा- "क्या ऐसा महल तुमने किसी और के लिए भी बनाया है?' कारीगर ने कहा- "नहीं राजकुमार।' राजकुमार ने कहा-अति उत्तम।
इसके बाद राजकुमार अपने एक दरबारी संजिक से बोला-" मैं ऐसा दूसरा महल कभी बनने भी नहीं दूँगा।' संजिक बोला-"वह कैसे?' राजकुमार ने कहा- "है एक तरीका।' ऐसा कहकर वह कुटिल मुस्कान बिखेरता हुआ आगे बढ़ गया। संजिक उसका आशय समझ गया। वह सोचने लगा कि एक श्रेष्ठ कलाकार को मारना उचित नहीं। अवसर देखकर वह कारीगर से मिला और उससे पूछा- "क्या महल तैयार हो चुका है?' कारीगर ने कहा- "जी, हुज़ूर।' संजिक ने कहा- "कई बार व्यक्ति की खूबी ही उसकी जान की दुश्मन बन जाती है। इसलिए तुम सचेत रहना।' ऐसा कहकर वह चला गया। अगले दिन जब राजकुमार ने कारीगर को बुलाकर पूछा कि महल पूरा हो गया या अभी काम बाकी है, तो कारीगर बोला- "कुमार, अभी तो एक ऐसा काम बाकी है, जिसकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता। इसके लिए मुझे अच्छी गुणवत्ता की लकड़ी की ज़रूरत है। साथ ही यह काम मैं एकान्त में करूँगा ताकि कोई देख न ले। आप इसकी व्यवस्था करा दें।' ऐसा ही किया गया। कारीगर अपने काम में जुट गया। उसने उस लकड़ी से एक विमान का निर्माण किया। इस बीच राजकुमार को कुछ संदेह हुआ। उसने चारों ओर से महल को घेर लिया। स्थिति को भाँपकर कारीगर ने अपनी पत्नी और बच्चे को विमान में बिठाया और उड़कर दूसरे राज्य में पहुँच गया। इसके बाद उसने और भी कई शानदार महल खड़े किए।
दोस्तो, कहते हैं प्रतिभा तभी फलीभूत होती है जब उसे चातुर्य का साथ मिल जाए, क्योंकि चतुरता ही प्रतिभा को कार्यान्वित करने वाला, उसे बढ़ाने वाला यंत्र होता है। यदि कारीगर में प्रतिभा के साथ चतुराई न होती तो निश्चित ही वह अपनी जान से हाथ धो बैठता। यानी इससे यह बात स्थापित होती है कि व्यक्ति में उसकी तरह ही प्रतिभा के साथ चातुर्य गुण भी होना चाहिए। चातुर्य गुण का सीधा संबंध बुद्धि से है। यानी प्रतिभावान व्यक्ति बुद्धिमान भी है तो उसे आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता। यदि कोई उसकी प्रतिभा को दबाने, कुचलने की कोशिश करेगा तो वह सफल नहीं हो पाएगा।
दूसरी ओर, आप बहुत-सी ऐसी प्रतिभाओं को जानते होंगे, जो एक सीमा से ज्यादा आगे बढ़ ही नहीं पार्इं। इनमें से किसी की खूबियों को देखकर लोग दावे करते होंगे कि देखना यह बहुत आगे जाएगा। वह आगे की तो छोड़ो, जहाँ था वहाँ से भी पीछे चला गया। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। लेकिन अकसर जो कारण अहम होता है वह है उस राजकुमार जैसा कोई व्यक्ति, जिसके मन में उसकी खूबी को देखकर सकारात्मक विचार आने की बजाए नकारात्मक विचार आए होंगे और उसने उसकी प्रतिभा को बढ़ाने, उसका उपयोग करने की बजाए उसे दबाना शुरु कर दिया होगा।
ऐसा क्यों होता है? ऐसा इसलिए होता है कि कई बार व्यक्ति की प्रतिभा को देखकर लोग खुश तो बहुत होते हैं, लेकिन साथ ही उन्हें यह भय भी सताने लगता है कि यदि यह हमें छोड़कर किसी और के लिए काम करनेे लगा तो नुकसान हो जाएगा। ऐसे में बिना बात के आशंकित होकर वे उस व्यक्ति के पर काटने लगते हैं, जिससे वह ज्यादा न उड़ सके यानी आगे न बढ़ सके। लेकिन इससे होता उल्टा है। जब बात असहनीय हो जाती है तो वह उड़ जाता है यानी कहीं और जाकर बेहतर तरीके से काम करने लगता है, जहाँ कि उसकी प्रतिभा की कद्र होती है।
इसलिए उचित यही है कि कोई यदि पूरी निष्ठा से आपके लिए अच्छा काम कर रहा है तो उसे प्रोत्साहित करें, उसे आगे बढ़ाएँ, वह और भी अच्छा करेगा। जिसका सीधा लाभ आपको और आपकी संस्था को होगा। तब वह भी सफलता की उड़ान भरेगा और आप भी। आज हम आपसे इतना ही कहना चाहेंगे कि आप भी अपनी प्रतिभा का चतुराई के साथ उपयोग करें और सफलता की ऊँची से ऊँची उड़ान भरें।
गुरुवार, 21 जुलाई 2016
यदि उड़ने नहीं दोगे तो वह उड़ जाएगा
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