नाम बेड़ी सन्त मल्लाह। पार लगावें ख्वाहमखाह।।
एक सुबह, एक घुड़सवार एक रेगिस्तानी रास्ते से निकल रहा था। एकआदमी सोया हुआ हैऔर उस घुड़सवार ने देखा,उस आदमी का मुंह खुला हुआ हैऔर एक छोटा सा साँप उसके मुँह में चला गया।वह घुड़- सवार उतरा। उसके पीछे उसके दो साथी थे। उनको उसने बुलाया। उस आदमी को उठायाऔर ज़बरदस्ती उसे घसीटकर पास ही नदी के किनारे ले गये और ज़बरदस्ती उन तीन चार लोगों ने उसे पानी पिलाना शुरु किया। वह आदमी चिल्लाने लगा,क्या तुम मनुष्यता के शत्रु हो,तुम क्यों मुझे पानी पिला रहे हो?तुम क्यों मुझे परेशान कर रहे हो?क्याज़बरदस्ती है यह?लेकिन उन्होंने बिल्कुल भी नहीं सुना। वे ज़बरदस्ती पानी पिलाते गये।वह नहीं पीने को राज़ी हुआ,तो उन्होंने धमकी दी कि वे उसे कोड़ों से मारेंगे। उस गरीब आदमी को ज़बरदस्ती पानी पीना पड़ा।लेकिन वह पानी पीता गयाऔर चिल्लाता गया, विरोध करता गया कि तुम क्या कर रहे हो? मुझे पानी नहीं पीना है। जब बहुत पानी वह पी गया, तो उसे उल्टी हो गयी और उस पानी के साथ वह छोटा सा साँप भी बाहर निकला। तब तो वह हैरान रह गया।वह आदमी कहने लगा कि तुमने पहले क्यों न कहा?मैं खुद ही अपनी मर्ज़ी से पानी पी लेता। उस घुड़- सवार ने कहा,मुझे जीवन का अनुभव है पहली बात, अगर मैं तुमसे कहता कि सांप तुम्हारे मुंह में चला गया है। तो तुम हँसते और कहते, क्या मज़ाक करते हैं। सांप और कही मुंह में जा सकता है?दूसरी बात, अगर तुम विश्वास कर लेते, तो यह भी हो सकता था कि तुम इतना
घबड़ा जाते कि तुम बेहोश हो जाते।और तुम्हें बचाना मुश्किल हो जाता।तीसरी बात,यह भी हो सकता था कि तुम पानी भी पीने को राज़ी होते,तो हमारे समझाने बुझाने में इतनी देर लग जाती कि फिर उस पानी पीने का कोई अर्थ न रहता। मुझे क्षमा करना, उस घुड़सवार ने कहा, मज़बूरी में हमें तुम्हारे साथ जोर करना पड़ा।उसके लिए क्षमा कर देना। लेकिन वह आदमी धन्यवाद देने लगा हज़ार हज़ार धन्यवाद देने लगा। यही आदमी थोड़ी देर पहले चिल्ला रहा था कि क्या तुम आदमियत के शत्रु हो, तुम यह क्या कर रहे हो? एक अन्जान आदमी के साथ यह क्या ज़बरदस्ती हो रही है। अब वह हज़ार हज़ार धन्यवाद दे रहा है।
गुरुवार, 11 अगस्त 2016
नाम बेड़ी सन्त मल्लाह
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