1. 1909: रहस्यमयी हवाई जहाजों का आतंक (The New Zealand Airship Wave)
1: इंसानी तकनीक से कोसों आगे
बात 1909 की है। उस समय इंसानी हवाई जहाज (Airplanes) बस लकड़ी और कपड़े के ढांचे थे। राइट ब्रदर्स ने अपनी पहली उड़ान सिर्फ 6 साल पहले भरी थी। उस दौर के जहाज न तो ज्यादा ऊपर उड़ सकते थे, न ही ज्यादा देर तक हवा में टिक सकते थे। और सबसे बड़ी बात—रात के अंधेरे में उड़ना उनके लिए मौत को दावत देने जैसा था। लेकिन जुलाई 1909 में न्यूजीलैंड (New Zealand) में जो हुआ, उसने इस तर्क को झूठा साबित कर दिया।
2: क्या देखा लोगों ने?
जुलाई के आखिरी हफ्तों में, न्यूजीलैंड के 'ओटागो' (Otago) इलाके में हड़कंप मच गया। हजारों लोगों ने पुलिस को फोन करके बताया कि उन्होंने आसमान में एक विशाल, काला और "सिगार के आकार" (Cigar Shaped) का जहाज देखा है। सबसे डरावनी बात यह थी कि यह जहाज रात के घुप अंधेरे में उड़ रहा था।
"गवाहों की जुबानी"
1909 के वो गवाह जिन्होंने कसम खाकर सच बोला:
1. थॉमस जेनकिंस (स्कूली छात्र): 10 मिनट तक पीछा किया
अखबार के मुताबिक, थॉमस ने सबसे साफ गवाही दी।
"दोपहर के 12 बजे थे। मैं स्कूल से घर जा रहा था, तभी पहाड़ी (East Side) के ऊपर से एक काला जहाज आया। वह बहुत नीचे उड़ रहा था। मैंने उसे लगातार 10 मिनट तक देखा। उसके पीछे एक पहिया (Propeller) था जो बहुत तेज घूम रहा था। वह जहाज घाटी (Gorge) की तरफ गया, थोड़ा नीचे हुआ और फिर गायब हो गया।"
2. थॉमस मैकडोनाल्ड (स्कूली छात्र): दो बार दिखा!
"मैंने उसे एक बार नहीं, बल्कि दो बार देखा—एक बार स्कूल जाते समय और दूसरी बार वापस आते समय। पहले मुझे लगा वो कोई बड़ा पक्षी है, लेकिन फिर मैंने देखा कि उसके पीछे एक पंखा (Propeller) बहुत तेज घूम रहा था। वह ब्लू माउंटेन (Blue Mountains) की तरफ से आया था।"
3. सिरिल फाल्कनर (स्कूली छात्र): अचानक मुड़ गया
"जहाज के पीछे एक बड़ा पहिया घूम रहा था। सबसे अजीब बात यह थी कि वह जहाज अचानक मुड़ गया (Sudden Turn)—जैसे कोई उसे कंट्रोल कर रहा हो। वह हवा में तैर रहा था।"
4. मिसेज रसेल (अकेली महिला गवाह): "प्रलय आ गई है!"
मिसेज रसेल उस समय बहुत बीमार थीं और यह नजारा देखकर बुरी तरह डर गईं।
"मैंने देखा कि एक 'काली लकीर' (Streak of Blackness) पहाड़ी के ऊपर से सीधा मेरी तरफ आ रही है। वह एक नाव (Boat) जैसा दिख रहा था। मुझे लगा कि दुनिया का अंत आ गया है! वह मेरे बहुत करीब (सिर्फ 300-400 गज दूर) था, फिर अचानक मुड़कर पेड़ों के पीछे गायब हो गया।"
5. मिसेज मेयो (Mrs. Mayo): रात की डरावनी आवाजें 😱
यह गवाही सबसे ज्यादा सस्पेंस वाली है। शुक्रवार रात 11:30 बजे जब सब सो रहे थे:
"अचानक मुझे एक अजीबोगरीब आवाज सुनाई दी—जैसे कोई बहुत बड़ा ड्रम बज रहा हो या कोई भारी मशीन चल रही हो (Dull rolling whirring noise)। साथ ही एक तीखी चीखने जैसी (Squeaking) आवाज भी थी। मेरे घर के बाहर बंधे घोड़े बुरी तरह डर गए और इधर-उधर भागने लगे। वह आवाज मेरे घर की छत के ठीक ऊपर से गुजरी और पहाड़ों की तरफ चली गई।"
6. एलन मिशेल और एलेक्स रीच (खेत में काम करने वाले):
"सुबह 10 बजे हमने देखा कि एक 'बड़ी नाव' (Boat-shaped) हवा में तैर रही है। वह ऊपर-नीचे (Dipping motion) हो रही थी। उसके ऊपर एक लंबा खंभा (Mast) लगा हुआ था। वह नदी पार करके समुद्र की तरफ चली गई।"
3: झूठ या सच? एक अनोखी परीक्षा
क्या यह सिर्फ बच्चों का वहम था? इसकी सच्चाई जानने के लिए अखबार के रिपोर्टर ने एक कड़ा इम्तेहान लिया। वह स्कूल पहुँचा और उन सभी छात्रों को अलग-अलग कमरों में बैठा दिया जिन्होंने जहाज देखने का दावा किया था। उन्हें एक-दूसरे से बात करने की इजाजत नहीं थी। फिर उनसे उस 'जहाज' का चित्र (Drawing) बनाने को कहा गया। नतीजा हैरान करने वाला था—सभी 6 बच्चों के चित्र बिल्कुल एक जैसे थे!। किसी ने भी पहले ऐसा जहाज नहीं देखा था, फिर भी सबने उसके "दो पाल" (Two sails) और पीछे लगे "पंखे" (Propeller) को बिल्कुल एक जैसा बनाया। यह इस बात का सबसे बड़ा सबूत था कि उन्होंने कोई कहानी नहीं बनाई थी, बल्कि सच में कुछ देखा था।
4: कौन चला रहा था उसे?
2 अगस्त 1909 के 'न्यूजीलैंड टाइम्स' की रिपोर्ट के मुताबिक, यह अजीबोगरीब घटना पिछले दो हफ्तों (Fortnight) से लगातार हो रही थी। उस दौरान साउथलैंड और ओटागो के इलाकों में यह "काला जहाज" बार-बार देखा गया। उस समय अखबारों ने इसे "जर्मन जासूस" कहा, लेकिन बाद में पता चला कि जर्मनी के पास भी ऐसी टेक्नोलॉजी नहीं थी जो न्यूजीलैंड तक उड़कर आ सके। 100 साल बाद भी यह रहस्य बना हुआ है कि उन 15 दिनों तक आसमान पर राज कौन कर रहा था?
Disclaimer (अस्वीकरण)
नोट: इस लेख में दी गई जानकारी 1909 के ऐतिहासिक दस्तावेजों और उस समय के न्यूज़ीलैंड के अखबारों (जैसे Otago Daily Times, New Zealand Times) पर आधारित है। इस ब्लॉग का उद्देश्य केवल इतिहास की इस रहस्यमयी घटना के बारे में जानकारी देना है। हम किसी भी तरह के अंधविश्वास का समर्थन नहीं करते हैं। लेख में इस्तेमाल की गई तस्वीरें केवल संदर्भ (Reference) और शिक्षा के उद्देश्य से ली गई हैं।
Source: New Zealand Times & Otago Daily Times Archives (1909).
2. 1913: जब सितारों ने निकाली 'बारात' (The Great Meteor Procession)
1: आसमान में परेड
1909 की न्यूजीलैंड वाली घटना के ठीक 4 साल बाद, 9 फरवरी 1913 की रात को अमेरिका और कनाडा के आसमान में कुछ ऐसा दिखा जिसे विज्ञान आज तक पूरी तरह नहीं समझ पाया। आमतौर पर उल्कापिंड (Meteors) आसमान से नीचे गिरते हैं और जल जाते हैं। लेकिन उस रात उल्कापिंड गिरे नहीं, बल्कि उन्होंने आसमान में एक "जुलूस" (Procession) निकाला।
2: क्या देखा लोगों ने?
हजारों लोगों ने देखा कि आसमान में 40 से 60 चमकते हुए गोले एक कतार में (Formation) चल रहे थे। वे बहुत धीरे-धीरे और बिल्कुल सीधी रेखा (Horizontally) में उड़ रहे थे, जैसे कोई हवाई जहाज फॉर्मेशन बनाकर उड़ रहा हो। यह नजारा किसी फौजी टुकड़ी के मार्च जैसा था। वे कनाडा से शुरू होकर अमेरिका होते हुए ब्राज़ील तक देखे गए—यानी हजारों किलोमीटर का सफर!
3: वो डरावनी गड़गड़ाहट
सबसे अजीब बात यह थी कि उल्कापिंड आमतौर पर आवाज नहीं करते, लेकिन उस रात लोगों ने बादलों में गड़गड़ाहट और धमाकों की आवाजें सुनीं। घरों की खिड़कियाँ हिल गईं। कुछ वैज्ञानिकों ने बाद में कहा कि शायद वो पृथ्वी का कोई "प्राकृतिक उपग्रह" (Natural Satellite) था जो नष्ट हो गया, लेकिन यूएफओ एक्सपर्ट्स मानते हैं कि कुदरती पत्थर कभी भी "परफेक्ट लाइन" में नहीं उड़ते। क्या वो किसी बड़े "मदर-शिप" (Mothership) का काफिला था जो पृथ्वी का चक्कर लगा रहा था?
SOURCES "तथ्य"
1913 की घटना (The Great Meteor Procession) के लिए सबसे भरोसेमंद और ऐतिहासिक सोर्सेज (Sources) ये हैं। आप इन्हें अपने ब्लॉग में "सोर्स" या "रेफरेंस" के तौर पर लिख सकते हैं ताकि आर्टिकल प्रोफेशनल लगे:
1. सबसे मुख्य सोर्स (Scientific Source)
Journal of the Royal Astronomical Society of Canada (1913):
इस घटना की सबसे विस्तृत रिपोर्ट कनाडाई खगोलशास्त्री (Astronomer) Clarence Chant ने तैयार की थी। उन्होंने 100 से ज्यादा गवाहों के बयानों को इकट्ठा करके इस जर्नल में प्रकाशित किया था। इसे आज भी इस घटना का सबसे बड़ा सबूत माना जाता है।
2. अखबार (Newspaper Source)
The Toronto Star (February 10, 1913):
घटना के अगले ही दिन टोरंटो स्टार और अमेरिका के कई अखबारों में इसकी हेडलाइन्स छपी थीं।
Monthly Weather Review (USA): अमेरिका के मौसम विभाग ने भी अपनी रिपोर्ट्स में अजीब आवाजों और धमाकों का जिक्र किया था।
Disclaimer (अस्वीकरण): 1913 की घटना
नोट: इस लेख का यह हिस्सा 9 फरवरी 1913 को हुई 'The Great Meteor Procession' के ऐतिहासिक और वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित है। इसमें दी गई गवाहियां और चित्र प्रोफेसर क्लैरेंस चैंट (Clarence Chant) की 1913 की वैज्ञानिक रिपोर्ट और 'टोरंटो डेली स्टार' (Toronto Daily Star) के अभिलेखागार से लिए गए हैं। इस ब्लॉग का उद्देश्य केवल इतिहास की इन दुर्लभ खगोलीय घटनाओं की जानकारी देना है। हम किसी भी दावे की पुष्टि नहीं करते हैं और न ही किसी अंधविश्वास को बढ़ावा देते हैं।
3. 1924: जब 'मंगल' से संपर्क के लिए थम गई दुनिया (National Radio Silence)
ब्रह्मांडीय सन्नाटा
21 अगस्त 1924 को मंगल ग्रह पृथ्वी के सबसे करीब था। अमेरिकी नौसेना (US Navy) के एडमिरल एडवर्ड एबरले ने एक ऐसा आदेश दिया जो आज के समय में नामुमकिन लगता है। उन्होंने पूरे देश से अपील की कि रात के समय रेडियो सिग्नल्स को 5 मिनट के लिए पूरी तरह बंद कर दिया जाए।
मकसद क्या था?
वैज्ञानिकों का मानना था कि अगर मंगल ग्रह पर कोई सभ्यता (Aliens) है, तो वे रेडियो तरंगों के जरिए हमसे संपर्क करने की कोशिश कर सकते हैं। रेडियो को खामोश करने का मकसद यह था कि अंतरिक्ष से आने वाले किसी भी "कमजोर सिग्नल" को बिना किसी शोर-शराबे के सुना जा सके।
क्या रिकॉर्ड हुआ?
रेडियो की खामोशी के दौरान, वॉशिंगटन स्थित नौसेना वेधशाला (Naval Observatory) में खगोलशास्त्री डेविड टॉड ने एक विशेष "रेडियो-रिसीवर" और एक "फोटोग्राफिक रील" का इस्तेमाल किया। उस रात रील पर कुछ अजीबोगरीब आकृतियाँ रिकॉर्ड हुईं, जिन्हें उस समय "मंगल के चेहरे" (Faces of Mars) कहा गया। हालांकि बाद में इसे तकनीकी गड़बड़ी कहा गया, लेकिन सवाल आज भी है—क्या वो सच में किसी परग्रही सभ्यता का संदेश था?
इस घटना के मुख्य तथ्य (Sources/तथ्य):
- मुख्य गवाह: अमेरिकी नौसेना के एडमिरल एडवर्ड एबरले और वैज्ञानिक डेविड टॉड।
- ऐतिहासिक दस्तावेज: अमेरिकी सरकार का 'National Radio Silence' का आधिकारिक अनुरोध।
- अखबारी सबूत: The New York Times (अगस्त 1924) की रिपोर्ट्स।
Disclaimer (अस्वीकरण): 1924 की घटना
नोट: यह जानकारी अगस्त 1924 के अमेरिकी नौसेना (US Navy) के दस्तावेजों और उस समय के अंतरराष्ट्रीय अखबारों की रिपोर्ट्स पर आधारित है। इस ब्लॉग का उद्देश्य केवल इतिहास की इस अनोखी घटना से पाठकों को अवगत कराना है। हम किसी भी एलियन संदेश की आधिकारिक पुष्टि नहीं करते हैं।
4. 1926: हिमालय के ऊपर वो 'चमकता अंडा' (The Roerich Sighting)
पहाड़ों में रहस्यमयी हलचल
अगस्त 1926 में मशहूर रूसी चित्रकार, दार्शनिक और खोजकर्ता निकोलस रोरिक (Nicholas Roerich) अपनी टीम के साथ हिमालय की यात्रा पर थे। रोरिक कोई साधारण इंसान नहीं थे, वे एक सम्मानित विद्वान थे। उनकी डायरी 'Altai-Himalaya' में एक ऐसी घटना का जिक्र है जिसने विज्ञान जगत को चौंका दिया था।
अचानक बदला हवा का रुख
5 अगस्त 1926 की सुबह, रोरिक और उनकी टीम ने कुनलुन पर्वतमाला के ऊपर आसमान में एक बहुत बड़ी, चांदी की तरह चमकती "अंडाकार" (Oval Shaped) चीज देखी। वह यान अविश्वसनीय रफ्तार से उत्तर से दक्षिण की ओर बढ़ रहा था। रोरिक ने दूरबीन (Binoculars) से उसे साफ़-साफ़ देखा।
तकनीक जो उस समय असंभव थी
सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि वह यान उड़ते-उड़ते हवा में ही अचानक मुड़ गया (Sudden Change in Direction) और दक्षिण-पश्चिम की ओर गायब हो गया। 1926 में पूरी दुनिया में ऐसी कोई इंसानी मशीन या हवाई जहाज नहीं था जो इतनी ऊंचाई पर उड़ सके और इतनी तेजी से अपनी दिशा बदल सके। रोरिक की टीम में मौजूद सभी लोग इस अद्भुत नजारे के गवाह थे।
इस घटना के मुख्य तथ्य (Sources/तथ्य):
मुख्य गवाह: निकोलस रोरिक और उनकी पूरी खोजी टीम।
ऐतिहासिक दस्तावेज: निकोलस रोरिक की डायरी - Altai-Himalaya: A Travel Diary।
स्थान: हिमालय की कुनलुन (Kunlun) पर्वतमाला।
